करबला मे कयामते सुगरा 13

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                       13/01/1442

    *हिन्दी* *हिस्सा-13*


*करबला में क़यामते सुग़रा*


*ⓩ हैरत दर हैरत वाली बात ये है कि जिस लश्कर में सिर्फ 82 लोग हों जिनमें औरतें और बच्चे भी हों और फिर ना उनके पास जंगी सामान हो उनसे लड़ने के लिए 22000 का लश्कर मय साज़ो सामान के,फिर भी यज़ीदियों के डर की इंतिहा देखिये कि इतनी बड़ी फौज रखने के बावजूद उन हाशमी शेरों से लड़ने की हिम्मत ना थी सो 500 घुड़सवार का लश्कर अलग से नहरे फुरात पर बिठा दिया ताकि उन्हें पानी ना मिलने पाये,कर्बला का वाक़िया ऐसा वाक़िया है जो सुन्नी तो सुन्नी बल्कि ग़ैर सुन्नी यहां तक कि ग़ैर मुस्लिमों तक को पता है,पर आपको उन बातों से रूबरू कराता हूं जो शायद कि आपके इल्म में ना हो,72 हज़रात इस जंग में शहीद हुए उन सबकी फ़ेहरिस्त अक्सर आजकल हर ग्रुप में भेजी जाती है,पर उनमें से जो हज़रात अहले बैत से हैं उन मुक़द्दस हस्तियों के नाम दर्ज करता हूं*

*हज़रत इमाम हसन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु के 4 साहबज़ादे इस जंग में शहीद हुए*

हज़रत क़ासिम बिन हसन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु 
हज़रत अब्दुल्लाह बिन हसन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु 
हज़रत उमर बिन हसन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु 
हज़रत अबु बकर बिन हसन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु

*हज़रत मौला अली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु के दूसरी बीवियों से 5 साहबज़ादे इस जंग में शहीद हुए*

हज़रत अब्बास बिन अली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु 
हज़रत उस्मान बिन अली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु 
हज़रत अब्दुल्लाह बिन अली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु
हज़रत मुहम्मद बिन अली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु 
हज़रत जाफर बिन अली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु

*हज़रते अक़ील के 4 फ़रज़न्द इस जंग में शहीद हुए*

हज़रत मुस्लिम बिन अक़ील रज़ियल्लाहु तआला अन्हु,ये इमाम आली मक़ाम के कर्बला पहुंचने से पहले ही अपने 2 बेटों के साथ शहीद कर दिए गए थे
हज़रत अब्दुल्लाह बिन अक़ील रज़ियल्लाहु तआला अन्हु 
हज़रत अब्दुर्रहमान बिन अक़ील रज़ियल्लाहु तआला अन्हु 
हज़रत जाफर बिन अक़ील रज़ियल्लाहु तआला अन्हु

*आपकी बहन हज़रत ज़ैनब रज़ियल्लाहु तआला अन्हा के 2 बेटे शहीद हुए* 

हज़रत औन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु 
हज़रत मुहम्मद रज़ियल्लाहु तआला अन्हु

*सय्यदुश शुहदा इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु के अलावा आपके 2 बेटे भी शहीद हुए*

हज़रत अली अकबर बिन हुसैन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु 
हज़रत अली असग़र बिन हुसैन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु

*ⓩ बाकी बचे हुए आपके अज़ीज़ थे जो शहीद हुए इसके अलावा हज़रत इमाम ज़ैनुल आबेदीन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु व हज़रत उमर बिन हसन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु व हज़रत मुहम्मद बिन उमर बिन अली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु और कुछ कम उम्र साहबज़ादे क़ैदी बनाए गए,हज़रते सकीना रज़ियल्लाहु तआला अन्हा जिनका अक़्द हज़रत क़ासिम बिन हसन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु के साथ मशहूर है,ये गलत है निस्बत हुई थी निकाह नहीं हुआ था,आपका निकाह मुस'अब बिन ज़ुबैर रज़ियल्लाहु तआला अन्हु के साथ हुआ

📕 खुतबाते मुहर्रम,सफ़ह 427-428

*फुक़्हा* - हुज़ूर सल्लललाहु तआला अलैहि वसल्लम फरमाते हैं कि मेरा रब कहता है कि मैंने हज़रत यहया अलैहिस्सलाम के क़त्ल के बदले 70000 को सज़ा दी और हुसैन के बदले 140000 को सज़ा दूंगा

📕 खसाइसे कुबरा,सफह 126

*क़ातिलीन हुसैन का अंजाम* - 10 मुहर्रमुल हराम 61 हिजरी को कर्बला में जिसका खून बहाकर यज़ीद पलीद ने हुक़ूमत हासिल की थी वो हुक़ूमत भी ज़्यादा दिन तक ना रही और 3 साल 7 महीने बाद ही 5 रबियुल अव्वल 64 हिजरी में 39 साल की उम्र में वो जहन्नम को रवाना हुआ,उसके बाद उसका बेटा यज़ीद बिन मुआविया तख़्त पर बैठा जो कि नेक शख्स था और बाप के बुरे कामों से नफरत करता था,जब वो तख़्त पर बैठा तो बीमार था और सिर्फ 2-3 महीने ही खिलाफत कर सका और 21 साल की उम्र में उसका इंतेकाल हो गया,अब मिस्र व शाम के लोगों ने हज़रत अब्दुल्लाह बिन ज़ुबैर रज़ियल्लाहु तआला अन्हु की बैयत कर ली मगर मरवान ने खूफ़िया साजिशों से मिस्र व शाम पर कब्ज़ा कर लिया,जब वो मरने लगा तो अपने बेटे अब्दुल मलिक को गद्दी सौंप दी,अब्दुल मलिक बिन मरवान के बारे में अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहु तआला अन्हु फरमाते हैं कि लोग बेटा पैदा करते हैं मगर मरवान ने बाप पैदा किया है,ये पहले तो नेक आदमी था मगर बाद में फासिको फ़ाजिर हो गया,इसके ज़मानये खिलाफत में कूफ़ा पर मुख़्तार बिन उबैद सक़फ़ी का तसल्लुत हुआ,मुख़्तार ने इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु की शहादत का खूब इन्तेक़ाम लिया मगर आखिर ज़माने में मुख्तार भी नुबूवत का दावा करके काफिरो मुर्तद हो गया 

! सबसे पहले अम्र बिन सअद व उसके बेटे हफ्स बिन अम्र की गरदन कटवाई

! खूली बिन यज़ीद जिसने इमाम का सरे मुबारक तन से जुदा किया था उसको सरे राह क़त्ल करवाकर उसकी लाश को जलवाया

! शिमर ज़िल जौशन खबीस का सर काटकर लाश को कुत्तों के सामने डाला गया

! अब्दुल्लाह बिन उसैद जुहनी,मालिक बिन नुसैर बद्दी,हमल बिन मालिक महारबी इन तीनों के हाथ पैर काटकर ज़िंदा छोड़ दिया गया,ये तीनों इसी तरह तड़पते बिलखते मर गए

! हकीम बिन तुफ़ैल ताई वो खबीस है जिसने हज़रत अब्बास अलमदार के कपड़े उतार लिए थे,सो इसको जिंदा ही नंगा करके तीरों से छलनी कर दिया गया

! अम्र बिन सुबैह ने शोहदाए करबला में से कई को ज़ख़्मी किया था,उसे नेज़ों से छेद छेद कर मारा गया

! ज़ैद इब्ने रक़ाद वो खबीस था जिसने अब्दुल्लाह बिन मुसलिम बिन अक़ील की पेशानी पर तीर मारा था,इसको तीरों से छलनी किया गया मगर जान बाकी थी तो उसको ज़िंदा जलवाया गया

! अब्दुल्लाह इब्ने ज़ियाद वो हरामखोर खबीस था जिसने अहले बैत पर काफी ज़ुल्म किये,शहादते कर्बला के ठीक 6 साल बाद 10 मुहर्रम 67 हिजरी को इस कुत्ते का सर काटकर वहीं रखा गया,जहां इसने इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु का सरे मुबारक रखा था,उस ज़लील के सर पर एक सांप नमूदार हुआ जो उसके नथुनों से घुसकर मुंह से निकलता रहा और फिर गायब हो गया

! 6000 कूफ़ी यानि राफजी मुख़्तार के हाथों मारे गए,कितने अंधे और कोढ़ी हो गए,कुछ की आंखों में जलती हुई सलाई फेरी गयी,कुछ को जिंदा जलाया गया,और कुछ के मुंह सुअर की तरह हो गए,और कुछ तो ऐसे थे कि पानी पीते मगर प्यास न बुझती और युंही तड़प तड़प कर मरे,और जैसा कि रब ने फ़रमाया था कि मैं 140000 को मारूंगा सो उसने अपना वादा पूरा किया और 140000 को हलाक़ किया,यहां पर एक सवाल उठता है कि हज़रत इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से जंग को तो 22000 का लश्कर ही गया था तो 140000 क्यों मारे गए,तो इसका जवाब ये है जैसा कि हदीस पाक में है कि जो शख्स गुनाह में शामिल ना हो मगर उसे अच्छा समझता हो तो वो भी उसी के मिस्ल है,तो अगर जंग में 22000 का लश्कर ही मौजूद था मगर हज़ारों मक्कार दोगले कूफ़ी यानि राफजी यानि शिया उसमे शामिल थे तो अल्लाह ने उन सबको तरह तरह की मुसीबतों में डालकर हलाक किया,और आज भी और क़यामत तक ये गद्दार युंहि मुसीबत मे गिरफतार रहेंगे युंहि अपना सीना पीटते रहेंगे और यही कहते रहेगे कि *ऐ हुसैन हम ना थे*

📕 ख़ुतबाते मुहर्रम,सफह 495---510
📕 खसाइसे कुबरा,सफह 126

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