मुहर्रम में क्या जाइज़ क्या नाजाइज़
🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 मुहर्रम में क्या जाइज़ क्या नाजाइज़ 🥀* *इस सब के वाबजूद अवाम में ऐसे लोग भी काफ़ी हैं जो ग़लती करते हैं और इसको ग़लती समझते भी हैं, और इस हराम को हलाल बताने वाले मौलवियों की भी उनकी नज़र में कुछ औक़ात नहीं रहती* *एक गॉव का वाकिया है कोई ताज़िये बनाने वाला कारीगर नहीं मिल रहा था या बहुत सी रक़म का मुतालबा कर रहा था वहाँ की मस्जिद के इमाम ने कहा कि किसी को बुलाने की ज़रूरत नहीं है, ताज़िया मैं बना दूंगा और इस इमाम ने गांव वालों को ख़ुश करने के लिए बहुत उम्दा बढ़िया और खूबसूरत ताज़िया बना कर दिया* *और फिर उन्हीं ताजियेदारों ने इस इमाम को मस्जिद से निकाल दिया और ये कहकर इस का हिसाब कर दिया कि ये कैसा मौलवी है कि ताज़िया बना रहा है, मौलवी तो ताज़ियेदारी से मना करते हैं और मौलवी साहब का बक़ौल शाइर ये हाल हुआ कि न ख़ुदा ही मिला न विसाले सनम, न यहाँ के रहे न वहाँ के रहे दरअसल बात ये है कि सच्चाई में बहुत ताक़त है हक़ हक़ ही होता है और सर चढ़ कर बोलता है और हक़ की अहमियत उनके नज़दीक भी होती है जो ना हक़ पर हैं* *बहरे हाल इस में कोई शक नहीं कि एक बड़ी तादाद में हमारे सुन्नी मुसलमान अवाम भाई हज़रत...