फितना पैदा करने वाला सबसे पहला शख्स बनू उमय्या का होगा उसका नाम यज़ीद होगा

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴



*🥀 फितना करने वाला सबसे पहला शख्स बनू उमय्या का होगा उसका नाम यज़ीद होगा 🥀* 



*अस्वाइक अल मुहर्रिका* _इमाम इब्न हजर अल हैतमी अल मक्की अल शाफ़ई رحمة الله تعالى عليه की किताब मशहूर है इस किताब का सफा नम्बर 314 और इसी रिवायात को_ *अशआतुल लमआत* _में शाह अब्दुल हक़ मुहद्दिस देहलवी رحمة الله تعالى ने लिखा_
 *इमाम इब्न हजर फरमाते है कि अबु हुरैरा رضي الله تعالى عنه को हुज़ूर صلى الله تعالى عليه واله وسلم की बारगाह से जो कुछ इल्म हासिल हुआ उसमे यज़ीद के बारे में भी था इसलिए वो दुआ किया करते थे और अल्लाह तआला ने उनकी दुआ कुबूल फरमाई (59 हिजरी में उनका विसाल हुआ)* 

_अब हो सकता है कि कुछ लोगो के पेट मे दर्द उठ जाए और वो ये कहें कि शरह को हम नही मानते तो कोई नही उनके दर्द का इलाज भी है और उन्ही के मुसल्लम बुजुर्ग इब्न कसीर की तारीख,_ *तारीख इब्न कसीर* _की जिल्द नम्बर 4 है जो कि मुतारजिम है इसका तर्जुमा किसी मौलाना अबूतलहा मुहम्मद असग़र ने किया है इसके सफा नम्बर 482 पर लिखते है_
 *कि "माह रजब 60 हिजरी में यज़ीद के हाथ पर उस के वालिद की वफ़ात के बाद खिलाफत की बैत की गई"*

_अब वो हदीस जिसमे यज़ीद पलीत का नाम भी आया है_ *मुसन्नफ इब्न अबि शैबा* _की जिल्द नम्बर 19 सफा नम्बर 594 हदीस नम्बर 37027 अबि ज़र رضي الله تعالى عنه सहाबी ए रसूल صلى الله تعالى عليه واله وسلم फरमाते है कि_
 *मैंने रसूल अल्लाह صلى الله تعالى عليه واله وسلم को फरमाते हुए सुना आपने इरशाद फ़रमाया मेरी सुन्नत को सबसे पहले बदलने वाला शख्स बनू उमय्या का होगा* 
_इसी हदीस को इमाम इब्न आदि رحمة الله تعالى عليه ने_ *अल कामिल* _में जिल्द नम्बर 3 हदीस नम्बर 21024, इमाम बहकी رحمة الله تعالى عليه ने_ *दलाइल अल नबुव्वत* _में जिल्द नम्बर 6 हदीस नम्बर 666, इमाम इब्न हजर असकलानी ने_ *मतालिब अल आलिया* _हदीस नम्बर 4462, और इब्न कसीर ने_ *अल बिदाया व अल निहाया* _में जिल्द 8 सफा 231 पर नकल किया_

*तारीख अल खुल्फा* _इमाम जलालुद्दीन सियुति رحمة الله تعالى عليه की किताब सफा नम्बर 166 पर इमाम जलालुद्दीन सियुति رحمة الله تعالى عليه ने लिखा कि_
*इमाम अबु याला رحمة الله تعالى عليه ने ज़ईफ़ सनद के साथ इस हदीस को लिखा, हज़रत अब उबैदा رضي الله تعالى عنه से रिवायात है वो कहते है अल्लाह के नबी صلى الله تعالى عليه واله وسلم ने इरशाद फ़रमाया मेरी उम्मत अदल व इंसाफ के साथ क़ायम रहेगी यहाँ तक के मेरी उम्मत में अदल व इंसाफ को खत्म करने वाला फितना करने वाला सबसे पहला शख्स बनू उमय्या का होगा उसका नाम यज़ीद होगा* 

_यही हदीस इमाम अबु याला رحمة الله تعالى عليه ने अपनी_ *मसनद* _में लिखा इमाम जलालुद्दीन सियुति رحمة الله تعالى عليه ने इस हदीस को ज़ईफ़ लिखा पर खुद इमाम अबु याला رحمة الله تعالى عليه इस हदीस को लिखने के बाद लिखते है कि इसके_ *सिक़ा सब सच्चे है*

_📚( मसनद अबि याला जिल्द नम्बर 2 सफा 176 हदीस नम्बर 871)_

*हुज्जतुल बालिगा* _शाह वलीउल्लाह رحمة الله تعالى عليه की किताब है जिनको सभी मानते है इसकी जिल्द नम्बर दो सफा नम्बर 330 वो लिखते है कि_
 *गुमराही की तरफ बुलाने वाले दो हुए है यज़ीद जो शाम में था और मुख्तार सक़ा जो इराक़ में था और इनकी तरह और भी बहुत सारे हुए है* 
_(ये हवाला इसलिए दिया कि इनको अहले हदीस बहुत ज्यादा मानते है)_ 

*_ये तो हो गई हदीस की बातें ये मैंने इसलिए बताया कि सनद रहे हदीस में भी यज़ीद पलीत का ज़िक्र मौजूद है लिहाज़ा इनकार करने से पहले बहुत सोच समझ लीजियेगा_* 

_कर्बला का लश्कर (जिन्हें क़ैद कर के ले जाया गया था) जब यज़ीद पलीत के दरबार मे पंहुचे इमाम क़ाज़ी अबु याला رحمة الله تعالى عليه अपनी किताब_
*अल वज़हीन वरय्यातेन* _में इमाम अहमद बिन हंबल رضي الله تعالى عنه से नकल करते है कि जब कर्बला के लश्कर को यज़ीद के दरबार मे लाया गया तो हाल ये था के यज़ीद शराब पी रहा था और नशे में शेर गुनगुना रहा था उसका मफ़हूम अर्ज़ है_
 *अपनी बीवी को मुखातिब कर के कहता है "ए उम्म ए हमीर (ये उसकी बीवी की कुन्नियत है) अगर मेरा इंतक़ाल हो जाये तो तू शोक से निकाह करना इसलिए के मरने के बाद दौबारा ज़िन्दगी नही है" मआज़ अल्लाह और कहता है के मैं पिछली शरीयतो पर नज़र डालता हूँ तो यहाँ से लेकर वहाँ तक हर शरीयत में मुझे शराब हलाल नज़र आती है सिवाय मुहम्मद (صلى الله تعالى عليه واله وسلم) की शरीयत के (मआज़ अल्लाह) लिहाज़ा शराब खूब पी (अपने आप को शेर में मुखातिब कर रहा है) के इसमे सुरूर है मस्ती है इसमे मज़ा है जिसने नही पिया वो क्या जाने शराब क्या चीज़ है*
 _और तीसरे शेर का मफ़हूम है की_
 *"क़यामत की बाते फ़िज़ूल है क़यामत की बातें मेरे सामने ना कहो कि इससे दिल बेकार हो जाता है इससे दिल मुर्दा हो जाता है" मआज़ अल्लाह* 

_यज़ीद पलीत ने तीन कुफ़्रिया शेर कहे_ 
*1 - मरने के बाद दौबारा ज़िंदा किये जाने का इनकार*
*2 - शराब की हिल्लत का इक़रार* 
*3 - और आखरत में उठाये जाने का इनकार*

_इन तमाम चीज़ों ने_ *इमाम अहमद बिन हंबल رضي الله تعالى عنه* _ने इस्तदलाल करते है कि यज़ीद के कुफ़्र पर काफिर होने पर ये शरई चीज़े है इस बिना पर उसको काफिर कहते है_

*अल बिदाया व अल निहाया* _में इब्न कसीर ने जिल्द नम्बर 8 सफा नम्बर 192,_ *अस्वाइक अल मुहर्रिकात* _इमाम अल्लामा इब्न हजर अल हैतमी अल मक्की अल शाफ़ई رحمة الله تعالى عليه सफा नम्बर 218 पर और इब्न असाकिर अपनी_ *तारीख* _में बयान करते है कि यज़ीद पलीत ने एक शेर पढा कहा के_
 *"ए मेरे बुजुर्गो तुम्हारी रूहें कहाँ है अगर आज तुम होते तो तुम्हारा दिल ठंडा हो जाता खुश हो जाते के मैंने आज जो अपने खानदान के बदर में क़त्ल हुए थे उनका बदला हुसैन (رضي الله تعالى عنه) के खानदान को तबाह कर के ले लिया है"* 
_क्या अब भी उसके कुफ़्र पर शक करोगे_ 

_अब वो बात जिसके लिए इतनी बड़ी पोस्ट लिखी गई जिस शख्स को अहले बैत नबुव्वत ने फतवा दिया हो उसे हमे फतवा देने की जरूरत नही लिहाज़ा इमाम इब्न जरीर तबरी जिल्द नम्बर 6 सफा 265 पर, इमाम इब्न असीर जिल्द नम्बर 4 सफा 36 पर लिखते है कि हज़रत सकीना رضي الله تعالى عنها बिन्त हुसैन رضي الله تعالى عنه कहा करती थी_ 
*"क़सम रब्ब अल आलमीन की मैंने किसी काफिर शख्स को नही देखा जो यज़ीद से बेहतर सुलूक कर रहा था"* 
_मतलब आप ये कह रही थी कि यजीद बदतरीन काफिर होने के बावजूद उसने सुलूक ये अच्छा किया कि हमे वापस मदीना जाने की इज़ाज़त दे दी थी_ 

*👉 अब अगर कोई इतने हवाला के बाद भी यज़ीद पलीत पाक साफ समझता हो तो समझे हम क्या है*



👑👑👑👑👑👑👑👑👑👑
*🏁 मसलके आला हजरत 🔴*

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

हुज़ूर ﷺ ने इमाम हुसैन رضی اللہ عنہ पर किसको कुर्बान किया है*05

मुहर्रम उल हराम में ब्याह शादी करना कैसा है* 02

आशूरा के दिन नेक काम करना कैसा* 09