हज़रते सकीना और घोडा़
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*🥀 हज़रते सकीना और घोड़ा (सिलसिला "करबला के मुतल्लिक़ कुछ झूटे वाक़ियात" से मुन्सलिक) 🥀*
हज़रते ज़ैनब के सर से चादर उतरी हुई है, बाल बिखरे हुये हैं, नज़र पथरायी हुई है, आँसुओं के दो मोटे मोटे क़तरे पलकों पर आ कर ठहरे हुये हैं, हज़रते सकीना बेहोश पड़ी हैं और अपने सरताज को देख कर रोती जा रही हैं।
इमाम हुसैन अपने बेटे ज़ैनुल आबिदीन से गुफ्तगू में मसरूफ थे और अपने पीछे बरपा होने वाली क़ियामत को ना देख सके, अब जो देखा तो दिल पर हाथ रख लिया।
इमाम हुसैन आगे बढ़े और बहन की गिरी हुई चादर को उठाया और सर ढाँप दिया, हज़रते सकीना को गोद में लिया, अली अकबर के खून से लिथड़े हुये सकीना के चेहरे को अपने इमामे से साफ किया, बिखरे हुये बालों को उंगलियों से दुरुस्त किया फिर फरमाया :
सकीना होश में आओ, बाबा की आखिरी ज़ियारत कर लो फिर सारी उम्र बाबा का चेहरा देखने को तरस जाओगी, बेटी सकीना उठो जल्दी करो, आखिरी मुलाक़ात कर लो, आखिरी बार बाबा के सीने से लिपट लो फिर तो सारी ज़िंदगी तम्हें भी सुगरा की तरह रो रो कर और तड़प तड़प कर गुज़ारनी है। तीन दिन की प्यासी बच्ची तीन दिन के प्यासे बाबा से गले मिल रही है। इमाम हुसैन ने कहा कि ए बच्ची! तुम थोड़ी देर बाद यतीम हो जाओगी! सकीना कहने लगी बाबा आप ना जायें, मेरे अब्बा जान ना जायें, आप चले गये तो बाबा किस को कहूँगी! फिर जब इमाम हुसैन घोड़े पर सवार हुये और घोड़े को चलाना चाहा तो वो हिल ही नहीं रहा है, आप ने नीचे देखा तो सकीना घोड़े के पाऊँ से लिपटी हुई है।
आप ने फरमाया कि बेटी बाप के दिल पर छुरियाँ ना चलाओ, फिर आप ने घोड़े से उतर कर बड़ी मुश्किल से बच्ची को खेमे में पहुँचाया और मैदान -ए- जंग की तरफ रवाना हुये।
ये क़िस्सा शहीद इब्ने शहीद वगैरा में मौजूद है और बयान करने वाले जैसे चाहते हैं नमक मिर्च लगा कर बयान करते हैं।
ये एक मनघढ़त क़िस्सा है जिसे सिर्फ रोने रुलाने के लिये घढ़ा गया है।
इस में हज़रते ज़ैनब के मुतल्लिक़ जो मज़कूर है कि "सर से चादर उतरी हुई है और उन के बाल बिखरे हुये हैं" क्या हुज़ूर ﷺ के घराने की एक शहज़ादी के बारे में ऐसा सोचा भी जा सकता है।
हज़रते सकीना जो कि शादी शुदा थीं, उन के बारे में कहना कि इमाम हुसैन ने गोद में लिया और वो घोड़े के पाऊँ से लिपट गयीं, ये किस तरह क़बूल किया जा सकता है?
ऐसा हो ही नहीं सकता कि अहले बैत ने इस तरह से बे-सब्री का मुज़ाहिरा किया हो, ये सब बातें बिल्कुल झूट हैं और किसी मुअतबर किताब में मौजूद नहीं है।
कुछ लोग बजाये अपनी इस्लाह करने के, जो ऐसे मनघढ़त और गुस्ताखी भरे वाक़ियात की हक़ीक़त बयान करता है, उसी पर गुड़ खा कर चढ़ जाते हैं, उल्टा चोर कोतवाल को डांटे।
कुछ मुक़र्रिरीन ने तो हद कर दी है, कहते हैं कि हमें दलील की ज़रूरत नहीं बल्कि अबू जहल को है!
अपनी तक़रीर में चार चाँद लगाने और अपनी बाज़ार को चमकाने के लिये ऐसे क़िस्सों को खूब रो रो कर बयान किया जाता है और लोगों की अक़ीदत और मुहब्बत के साथ खिलवाड़ किया जाता है।
अल्लाह त'आला हमें अहले बैत की तरफ ऐसे झूटे क़िस्सों को मन्सूब करने से बचाये और उन की शानों के लाइक़ उन की ताज़ीमो तकरीम करने और उन से मुहब्बत करने की तौफ़ीक़ अता फरमाए।
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*🏁 MASLAKE AALA HAZRAT 🔴*
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