चौथा तबका उम्मते मुस्लिमा की अक्सरियत का रेह गया..... *जो एहले-सुन्नत-वल-जमात केहलाया ।
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*🥀 दास्तानें करबला 🥀*
❗️ *पोस्ट- 7* ❗️
4️⃣ *चौथा तबका:*
चौथा तबका उम्मते मुस्लिमा की अक्सरियत का रेह गया..... *जो एहले-सुन्नत-वल-जमात केहलाया ।*
👉🏼 *इन्होने हज़रत मौला अली शेरे खुदा ही को हक़ पर माना।* इन्ही की दस्ते हक़ परस्त पर बैत की, उन्ही को खलीफा-ए-बरहक और इमामे राशिद मानते और उन्ही की हुकूमत को सच्ची हुकूमत मानते। *और हज़रते मुआविया रदिअल्लाहु तआला अन्हु की हुकूमत पर हया और अदब के लिहाज से चुप रेहते थे ।*
👉🏼 चूंकि आप सहाबी ए रसूल थे, और *हुज़ूर सल्लललाहो अलैहि वसल्लम* ने आपकी फजीलत वाजेह कर दी थी, इसलिए किसी किस्म की तान दराजी नहीं करते थे ।
*हज़रत अलीयूल मुर्तजा* की शहादत के बाद, जब इमाम हसन ए मुजतबा को खलीफा चुन लिया गया, तब उन्होंने ने अपने दौरे खिलाफत में पाया की उम्मत दो हुकूमतो में तकसीम है।
हज़रत इमाम हसन (र अ) ने देखा कि, खवारिज की साजिशे पूर जोश में उम्मत को तकसीम करने में चल रही है। *लिहाजा अगर ऐसा ही चलता रहा तो उम्मत हमेशा दो हिस्सों में बटी रेह जाएगी ।*
*⌛ (बाकी अगली पोस्ट में इंशा अल्लाह)*
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