कूफ़ियों की शरारत, और इमामे मुस्लिम की शहादत।*

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*🥀 वाक़यात-ए-कर्बला 🥀* 



*⌛(किस्त न० 04)* 

✏️ *कूफ़ियों की शरारत, और इमामे मुस्लिम की शहादत।* 

      जब कूफ़ा वालों को यज़ीद ख़बीस की तख़्त नशीनी, और इमाम हुसैन رضی اللہ عنہ से बैअ़त तलब करने, और इमाम हुसैन رضی اللہ عنہ के मदीना छोड़कर मक्का जाने की ख़बर मिली। तो फ़रेब और अ़य्यारी की पुरानी रविश याद आई। सुलेमान बिन सरद ख़ुज़ाई के मकान पर जम्अ़ हुए, हम मशवरा हो कर अ़र्ज़ी लिख़ी। कि तशरीफ़ ले आइए। और हमको यज़ीद के ज़ुल्म से बचाइए। डेढ़ सो अर्ज़ियां जम्अ़ हो जाने पर इमाम رضی اللہ عنہ ने तेहरीर फ़रमाया "अपने मोतमद चचाज़ाद भाई मुस्लिम बिन अक़ील رضی اللہ عنہ को भेजता हूं, अगर यह तुम्हारा मामला ठीक देख कर ख़बर देंगे तो हम जल्द तशरीफ़ लाएंगे।

      ह़ज़रते मुस्लिम बिन अक़ील رضی اللہ عنہ कुफ़ा पहुंचे, इधर कूफ़ीयों ने इमाम رضی اللہ عنہ के हाथ पर बैअ़त करने और इमाम को मदद देने का वादा किया। बल्कि अठ्ठारह ह़ज़ार दाख़ीले बैअ़त भी हो गए। और मुस्लिम बिन अक़ील رضی اللہ عنہ को बातों में लाकर यहां तक इत्मीनान दीलाया। कि उन्होंने इमाम हुसैन رضی اللہ عنہ को तशरीफ़ लाने के लिए लिख़ दिया।

      उधर यज़ीद पलीद को कूफ़ियों ने ख़बर दी कि "हुसैन ने मुस्लिम को भेजा है। कूफ़ा के हाकिम नोमान बिन बशीर (رضی اللہ عنہ) इनके साथ नरमी का बरताव करते हैं। कूफ़ा का भला चाहता है तो अपनी तरह कोई जबर्दस्त ज़ालिम भेज।"

      उसने अब्दुल्लाह बिन ज़ियाद को हाकिम बनाकर भेजा और कहा कि "मुस्लिम को शहीद करे या कुफ़ा से निकाल दे। जब यह मरदक कुफ़ा पहुंचा। इमाम رضی اللہ عنہ के साथ 18000 की जमाअ़त पाई, अमीरों को धमकाने पर मुक़र्रर किया, किसी को धमकी दी, किसी को लालच से तोड़ा। यहां तक कि थोड़ी देर में इमाम मुस्लिम के पास सिर्फ 3 आदमी रह गए मुस्लिम यह देखकर मस्जिद के बाहर निकले की पनाह लें। जब दरवाज़े से बाहर आए एक भी साथ ना था। انا لله وانا اليه راجعون आख़िर एक घर में पनाह ली। इब्ने ज़ियाद ने यह ख़बर पा कर फ़ौज भेजी। जब इमाम मुस्लिम को आवाज़ें पहुंची, तलवार लेकर उठे और उन्हें मकान से बाहर निकाल दिया। कुछ देर बाद फिर जमअ् होकर आए। शेरे ख़ुदा का भतीजा फिर तेग़ बकफ़ उठा और आन की आन में इन को परेशान कर दिया। जब इन ना मर्दों का इस अकेले मर्दे ख़ुदा पर कुछ बस न चला तो मजबूर होकर छतों पर चढ़ गए। पत्थर और आग के लोके फेंकने शुरू किए। शेरे मज़्लूम का तन इन जालिमों के पत्थरों से ख़ून ख़ून था। मगर वो हमला करते हुए निकले और रास्ते में जो गरौह खड़े थे उन पर अज़ाब की तरह टूट पड़े। यह देख कर इब्ने अशअ़स ने कहा आपके लिए अमान है। ना आप क़त्ल किए जाएं, ना कोई गुस्ताख़ी हो। मुस्लिम मज़्लूम थक कर दीवार से पीठ लगा कर बैठ गए।

      एक खच्चर सवारी के लिए हाज़िर हुआ, आपके हाथ से तलवार ले ली गई। खच्चर पर सवार होकर आपको इब्ने ज़ियाद के पास लाया गया। इमाम ने पीने के लिए पानी मांगा। पहले तो आपको मना कर दिया गया। फिर उनमें से एक ने आप को पानी दिया लेकिन आपके चेहरे से ख़ून टपक रहा था। जिसकी वजह से ख़ून पानी में आ गया और आपने प्याला रख दिया। गौया आपकी किस्मत में अब दुनिया का पानी था ही नहीं।

      जब आप इब्ने ज़ियाद के सामने लाए गए उसे सलाम ना किया। वह भड़क उठा और कहा तुम ज़रूर क़त्ल किए जाओगे। आप उस वक़्त बड़े परेशान थे। आंखों से आंसू जारी थे। और यह सिर्फ इसलिए कि मैंने इमाम हुसैन को तशरीफ़ लाने के लिए ख़त लिख दिया है। काश कोई उन्हें ख़बर कर दे। फिर आपने वसीयत की। और उसमें यह वसीयत भी रखी कि इमाम हुसैन को मेरे हालात की ख़बर दी जाए। और उन्हें आने से रोक दिया जाए।

      फिर जल्लाद ज़ालिम आपको महल के ऊपर ले गया। इमाम मुस्लिम رضی اللہ عنہ बराबर तस्बीह व इस्तिग़फ़ार में मश्ग़ूल थे। इसी हालत में शहीद किए गए। और आपका सर मुबारक यज़ीद के पास भेजा गया।

 *(📚 आईनए क़यामत, पेज न० 30 से 33 तक)* 

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