हज़रत इमाम हुसैन रदीअल्लाहु तआला अन्हु की मदीने से हिजरत

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     *🥀 दास्तानें करबला 🥀* 



           ❗️ *पोस्ट- 12* ❗️

⚔️ *हज़रत इमाम हुसैन रदीअल्लाहु तआला अन्हु की मदीने से हिजरत*  


🤺 यजीद को जब इस बात का पता चला की इमाम हुसैन रदीअल्लाहु तआला अन्हु ने मेरी बैअत नही की तो वह भड़क उठा और उसने आमीले मदीना को हुक्म भेजा की इमाम हुसैन रदीअल्लाहु तआला अन्हु को *मेरी बैअत पर मजबुर करो वरना उसका सर काटकर मेरे पास भेज दो।*

🤺 *हजरत इमाम हुसैन* रदीअल्लाहु तआला अन्हु को जब इस यजीदी हुक्म का पता चला तो आपने मदीना मुनाव्वरा की सुकुनत तर्क फरमाकर मक्का मुअज्जमा चले जाने का इरादा कर लिया। मदीना मुनव्वरा से रवानगी से पहले रात को नाना जान! *हुजुर सलल्लल्लाहु अलैही वसल्लम* के मजारे अनवर पर हाजीर हुए और रो रोकर अर्ज हाल करने लगे। फिर रौजा-ए-अनवर से लिपटकर वही सो गये, *ख्वाब मे देखा की नाना जान तशरिफ लायें है।*, 

❤️ आपने हुसैन को चुमा और सिने अकदस से लगा लिया और फरमाया --

           *"बेटा हुसैन !* अनकरिब जालिम तुझे करबला मे भुखा प्यासा शहीद कर देगें तेरे मां-बाप और भाई तेरे इंतेजार मे है और बहीश्त तेरे लिए सजाई जा रही है, उसमें ऐसे दर्जाते आलिया है जो शहीद हुए बेगैर तुझे नही मिल सकते। *जाओ बेटा सब्र व शुक्र से जामे शहादत पीकर मेरे पास आ जाओ,*

⚔️ *हजरत इमाम हुसैन* रदीअल्लाहु तआला अन्हु यह ख्वाब देखकर घर आये और अहले बैत को जमा करके यह ख्वाब सुनाया और मदीने से मक्का जाने का पक्का इरादा कर लिया और फिर अपने बिरादरे बुजुर्ग हजरत इमाम हसन (रदि अल्लाहु अन्हु) के मजार पर हाजीर हुए और कलिमाते रूखसत जबान पर लाये। 

❤️ फिर मां की कब्रे अनवर पर हाजीर हुए और अर्ज किया :
           *"ऐ अम्मा जान!* यह नाजो का पाला तुम्हारा हुसैन आज तुमसे जुदा होने आया है और आखरी सलाम अर्ज करता है।,

❤️ *कब्रे अनवर से अवाज आयी:* वअलैकुम अस्सलाम ऐ मजलुम (जिस पर जुल्म हो) आप वहां कुछ देर रोते रहे और फिर वापस तशरिफ लाये और मक्का मुअज्जमा को रवाना हो गये.....!!


( 📚 *तजकिरा-ए-हुसैन, सफा-27,)* 


               ❤️ *सबक :* ❤️

🔸 *हजरत इमाम हुसैन को आपकी अपनी शहादत का इल्म था।* यह आप ही की शान है की इल्म के बावजुद जर्रा बराबर भी आपके कदम नही डगमगाते और शौके शहादत मे कमी नही आती। 

हजरत इमाम हुसैन ने अपनी सिरत पाक से बता दिया की तालीबे रजाए-हक, मौला की मर्जी पर फिदा होती है।  इसी मे उसका दिल का चैन और उसकी हकीकी तसल्ली है। कभी वहशत व परेशानी उसके पास नही फटकती बल्कि वह इंतेजार कि घड़ीयां शौक के साथ गुजारता है और वक्त मुकर्ररा का बेचैनी से इंतेजार करता है...

*⌛ (बाकी अगली पोस्ट में इंशा अल्लाह)*



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