कुफीयों के खुतुत
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*🥀 दास्तानें करबला 🥀*
❗️ *पोस्ट- 13* ❗️
*!!..कुफीयों के खुतुत..!!*
🤝 *हजरत अमीर मुआविया* रदि अल्लाहु अन्हु की वफात के बाद यजीद तख्त पर बैठा तो *अहले इराक* को जब मालुम हुआ की *हजरत इमाम हुसैन* रदि अल्लाहु त‘आलाअन्हु ने यजीद की बैअत नही की.....
.....और आप मक्का मुअज्जमा तशरिफ ले गये है तो उन्होंने मुत्तफिक (एक राय) होकर इमाम हुसैन की खिदमत मे खत भेजना शुरू किये जिसमे इस अम्र का इजहार था की *हम अपने जान व माल आप पर कुरबान कर देंगे,* आप यहां कुफे मे तशरिफ लाये, हम आपकी बैअत करके आपके हुक्म से जालिमो से मुकाबला करेगें, और आपका हरहाल में साथ देंगे।
📩 इस तरह के इल्तिज़ा भरे खतों का सिलसिला शुरू हो गया और तमाम जमाअतो और फिर्को की तरफ से *डेढ़ सौ (150) के करिब खत हजरत इमाम की खिदमत पहुंचे.*
*आप कहां तक खामोश रहते ? ? ?*
🤺 आप ने कुफा जाने का इरादा किया, लेकिन आप के असहाब और दीगर सहाबियों ने आप को मश्वरा दिया कि, *कुफ़ा वाले पहले भी गद्दारी कर चुके हैं.* इसलिए उनका ऐतबार कर के आपका वहां जाना सही नहीं है। बजाय आपके किसी और को भेज कर हालात का जायजा लिया जाए। लोगो के मशवरे से आप ने *हज़रत मुस्लिम बिन अकील* को कूफा भेजने का इरादा किया।
📩 आपने उन्हें जवाब दिया की "तुम्हारे खत डेढ़ सौ (150) के करिब पहुंचे। मैं फिलहाल अपने चचाजाद भाई मुस्लिम बिन अकील को तुम्हारी तरफ भेजता हुं। ताकी तुम्हारी सच्चाई का पता चल सके। *तुम अगर वाकई मेरा साथ देना चाहते हो तो मेरे नुमांइदे मुस्लिम बिन अकील की बैअत करो।* जब वह तुम्हारे हाल और सच्चाई की मुझे इत्तिला करेगे तो मै भी आ जाऊंगा....!!
( 📚 *सवानहे करबला, सफा-52,*
*तजकिरा-ए-हुसैन, सफा-300, )*
❤️ *सबक* ❤️
कुफीयों के बेवफाई मशहुर होने के बावजुद हजरत इमाम हुसैन (रदिअल्लाहु अन्हु) ने उनकी दरख्वाशत पर तवज्जोह इसलिए फरमाई..... ताकी, कल क्यामत के दिन वोह लोग येह न कह सके की हम जालिमो से मुकाबला और उन से रिहाई के तलबगार थे लेकीन इब्ने अली हुसैन (रजी अल्लाहु अन्हु) ने हमारी किसी तरख्वास्त पर तवज्जोह नही फरमाई, हजरत इमाम अली मकाम ने ये तमामे हुज्जत के लिये अपने भाई को कुफे भेज दिया, आप अपना फर्ज अदा करने को तैयार हो गये....
*⌛ (बाकी अगली पोस्ट में इंशा अल्लाह)*
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*🏁 MASLAKE AALA HAZRAT 🔴*
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