इसे भी हज़म कीजिये तारीखुल खुलफा में मौजूद एक रिवायत (सिलसिला "करबला से मुतल्लिक़ कुछ झूटे वाक़ियात" से मुन्सलिक)
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*🥀इसे भी हज़म कीजिये तारीखुल खुलफा में मौजूद एक रिवायत (सिलसिला "करबला से मुतल्लिक़ कुछ झूटे वाक़ियात" से मुन्सलिक) 🥀*
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कहा जाता है कि इमाम मुस्लिम बिन अक़ील के बच्चों की शहादत का क़िस्सा फुलाँ फुलाँ मुअतबर कुतुब में मौजूद है लिहाज़ा ये झूटा नहीं हो सकता तो चलें थोड़ी देर के लिये मान लेते हैं कि मुअतबर कुतुब में झूटी रिवायात नहीं हो सकती लेकिन अब आप इस रिवायत का क्या जवाब देंगे जो इमाम सुयूती रहीमहुल्लाह की किताब "तारीखुल खुलफा" में मौजूद है :
فلما رھقه السلاح عرض علیھم الاستسلام والرجوع والمضی الی یزید فیضع یدہ فی یدہ فابوا الاقتله فقتل
"जब इमाम हुसैन को हथियारों ने घेर लिया तो इमाम ने उन पर सुलह पेश की और लौटने की ख्वाहिश की और यज़ीद के पास जाने की ताकि अपना हाथ उस के हाथ पर दे दें।"
(تاریخ الخلفاء، ص207)
इमाम मुस्लिम बिन अक़ील के बच्चों के झूटे क़िस्से को हज़म करने वालों को चाहिये कि ज़रा इसे भी हज़म कर के दिखाएं।
बच्चों वाला क़िस्सा तो फिर भी कुतुब -ए- तवारीख में मौजूद नहीं है लेकिन मज़कूरा इबारत तो मुअतबर किताब में मौजूद है।
इस रिवायत के मुतल्लिक़ हज़रते अल्लामा मुफ्ती शरीफुल हक़ अमजदी रहीमहुल्लाह फरमाते हैं कि ये रिवायत जाल और किज़्ब है और ये बात दुश्मनों की उड़ायी हुई है।
(فتاوی شارح بخاری، ج2، ص70)
जान लीजिये कि क़ुरआन -ए- मजीद के इलावा कोई ऐसी किताब नहीं जिस में गलतियों का इमकान ना हो।
किताबें लिखने वाले इन्सान ही थे लिहाज़ा उन से भी गलतियाँ हो सकती हैं, ये कोई ज़रूरी नहीं कि किसी मुअतबर किताब में मौजूद एक एक लफ्ज़ मुअतबर और मुस्तनद हो।
अगर ऐसा है तो फिर सिहाह सित्ता के बारे में क्या ख्याल है, ये तो मुअतबर किताबें हैं लेकिन इन में भी मौज़ू रिवायात मौजूद हैं।
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*🏁 MASLAKE AALA HAZRAT 🔴*
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