10 वीं मुहर्रम सन 61 हिजरी के दिल दहेलाने वाले वाक़िआत 22
🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴
*🥀 दास्तानें करबला 🥀*
❗️ *पोस्ट- 22* ❗️
💔 *10 वीं मुहर्रम सन 61 हिजरी के दिल दहेलाने वाले वाक़िआत*
⚔️ *10 मुहर्रम जुम्मा की सुबह इमाम हुसैन रदीअल्लाहु तआला अन्हु ने तमाम अहले बैअत के साथ फज्र के वक़्त अपनी उम्र की आखिरी नमाज बा जमाअत निहायत जौको शौक के साथ अदा फरमाई।* नमाज से फारिग हो कर खैमे में तशरीफ लाए, आफताब करीबे तुलूअ है, इमामे आली मकाम और उनके तमाम अहले बैत तीन दिन के भूके प्यासे हैं, एक कतरा पानी का मुयस्सर नहीं आया और एक लुक्मा हलक से नीचे नहीं उतरा है.....
*.....इसके अलावा तेज धूप, गर्म रेत, गर्म हवाएं.....*
🤺 और इन गरीबाने बेवतन पर जोरो जफा के पहाड़ तोड़ने के लिये *तरो-ताज़ा, तीरों और तलवारों के साथ बाईस हज़ार का लश्कर सफ़ें बांधे मौजूद। जंग का नक्करा बजा दिया और मुस्तफा ﷺ के लाल और फातिमा व अली के जिगर के टुकड़े को महेमान बना कर बुलाने वाली कौम ने जानों पर खेलने की दावत दी।*
⚔️ *इमामे हुसैन रदीअल्लाहु तआला अन्हु जंग के मैदान में तशरीफ लाते हैं।* आप ने यजीदी लश्कर से मुखातिब हो कर *एक खुतबा* फ़रमाया........ :
❣️ *खुतबा ए इमाम हुसैन* ❣️
"ख़ूने नाहक हराम है, और गजबे इलाही का मूजिब है...... *मैं तुम्हें आगाह करता हूं कि तुम इस गुनाह में मुब्तिला न हो, मैंने किसी को क्तल नहीं किया है, किसी का घर नहीं जलाया, किसी पर हम्ला आवर नहीं हुवा।"*
"अगर तुम अपने शहर में मेरा आना नहीं चाहते, तो मुझे वापस जाने दो, तुमसे किसी चीज का तलबगार नहीं, तुम्हारे दर पे आजार नहीं, तुम क्यू मेरी जान के दरपे हो और *तुम किस तरह मेरे खून के इलज़ाम से बरी हो सकते हो ?*
"रोज़े मेहशर तुम्हारे पास मेरे खून का क्या जवाब होगा ? अपना अंजाम सोचो और अपनी आकिबत पर नज़र डालो, फिर ये भी समजो कि *मैं कौन और बारगाहे रिसालत में किस चश्मे करम का मंजूरे नज़र हुं, मेरे वालिद कौन है और मेरी वालिदा किस की लखते जिगर है ?"*
"मैं उन्ही बतुले ज़हरा का नुरे दीदा हुं, जिन के पुल सिरात पर गुज़रते वक़्त अर्श से निदा की जाएगी की ऐ अहले मेहशर ! सर झुकाओ और आँखे बंद करो की हज़रते *खातुने जन्नत पुल सिरात से 70000 हूरो को रिकाबे सआदत में ले कर गुज़रने वाली है।"*
*"मैं वही हुं जिसकी मुहब्बत को सरवरे आलम ﷺ ने अपनी मुहब्बत फ़रमाया है, मेरे फ़ज़ाइल तुम्हे खूब मालुम है, मेरे हक़ में जो अहादीश वारिद हुई है इस से तुम बेखबर नही हो।*
🤺 आपके ख़ुतबे जवाब ये दिया गया कि: "तमाम फ़ज़ाइल हमे मालुम है, मगर इस वक़्त ये मसअला ज़ेरे बहष नही है, आप जंग के लिये किसी को मैदान में भेजिये और गुफ्तगू खत्म फरमाये।"
*इमाम हुसैन* रदीअल्लाहु तआला अन्हु ने फ़रमाया कि : "मैं हुज्जते खत्म करना चाहता हुं, ताकि, इस जंग को दफा करने की तदबिर में से मेरी तरफ से कोई तदबीर रह न जाए और अब जब तुम मजबूर करते हो, तो ब मजबूरी व नाचारी मुझको तलवार उठानी ही पड़ेगी ।"
(📚 सवानहे करबला सफा 137)
*⌛ ( बाकी अगली पोस्ट में इंशा अल्लाह )*
👑👑👑👑👑👑👑👑👑👑
*🏁 MASLAKE AALA HAZRAT 🔴*
https://chat.whatsapp.com/BlTnmJKrHakLQ0Y3Q9Q1KC
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें