हज़रत इमाम हुसैन और अहले बैत की कुफे की तरफ रवानगी 18

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     *🥀 दास्तानें करबला 🥀* 



           ❗️ *पोस्ट- 18* ❗️

🐎     *हज़रत इमाम हुसैन और अहले बैत की कुफे की तरफ रवानगी....!!*

🐪      हज़रत मुस्लिम बिन अकील रदीअल्लाहु तआला अन्हु का खत मिलने पर आपने सफरे इराक का इरादा फ़रमाया । लेकिन सहाबा ए किराम और आपके दीगर असहाब, इमाम हुसैन के इस सफर से राजी ना थे। *उन्होंने आपको सफर मुल्तवी करने पर इसरार किया।* लेकिन कूफियों की दरख्वास्त और हज़रत मुस्लिम का खत आपको सफर आगाज करने से ना रोक पाया। 

🗓      *चुनांचे______, सन 60 हिजरी 3 जिल हिज्जा को, हज़रत इमामे हुसैन रदीअल्लाहु तआला अन्हु मक्का ए मुअज्जमा से कूफा की तरफ रवाना होते है। आपके साथ आपके अहले बैत और खुद्दाम इस तरह कुल मिला कर 82 लोग शामिल थे ।*

🐫      ये मुख्तसर सा अहले बैत का काफिला मक्का मोअज्जमा से रुखसत हुआ_____ *तो, मक्का का बच्चा- बच्चा इस काफिले को रुखसत होता देखकर आबदीद और गमगीन हो रहा था।* 

हज़रते इब्ने अब्बास, इब्ने उमर, हज़रते जाबिर, अबू सईद खुदरी, अबू वाकिद लैशी और दूसरे असहाबे किराम रदीअल्लाहु तआला अन्हुम आखिर तक येही कोशिश करते रहे कि, आप मक्का से तशरीफ ना ले जाए, *लेकिन ये तमाम कोशिशें आपके इरादे को ना बदल पाई।*

🐫     रास्ते में बतने जिलरमा नामी मकाम से रवाना होने के बाद हज़रत अब्दुल्लाह बिन मुतीअ से मुलाकात हुई। उन्होंने भी आपको सफर तर्क करने पर इसरार किया। 

          *लेकिन हज़रत इमाम हुसैन ने फ़रमाया:*
          "हमें वोही मुसीबत पहोंच सकती है, जो ख़ुदावंदे आलम ने हमारे लिये मुकर्रर फरमा दी"

*(📖 सुर ए इब्राहिम: आयत 27)*

🐫    काफिला जब मकामे  शकुक मे पहुंचा तो कुफा से आने वाले *एक आदमी ने हजरत इमाम हुसैन को बताया की कुफीयों ने बेवफाई की और हजरत मुस्लिम (रदि अल्लाहु तआला अन्हु) शहीद कर दिये गये।*

हजरत इमाम हुसैन ने यह खबर सुनकर रो पड़े और 
*#इन्ना__लिल्लाहि__व__इन्ना__इलैहि__रजिऊन, पढ़ी,*

🐫     आप ने खैमे में आकर ये खबर दी और लोगो की इस पर राय मांगी। काफिले वालों ने मुख्तलिफ राय दी, एक दफा आपने भी वापसी का इरादा फ़रमाया। *लेकिन बहुत मशवरें के बाद ये तय किया गया की सफर जारी रखा जाए और वापसी का खयाल तर्क किया जाए।*

*(📚 सवानहे करबला / मुतरजम सफा 129)*

               ❤️    *सबक*    ❤️ 

हजरत इमाम हुसैन रदि अल्लाहु तआला अन्हु और आपके अहले बैअत सभी हक के खातीर कमर कसे हुवे थे और उन्हे मौत का कोई डर न था, यजीद के फिस्क व फुजुर के खिलाफ आवाज बुलंद करने मे उन्हें किसी दुनियावी नुकसान का  डर नही था...!!

*⌛ ( बाकी अगली पोस्ट में इंशा अल्लाह )*



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