उमर बिन सा‘द_ और बाईस हज़ार का लश्कर 20
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*🥀 दास्तानें करबला 🥀*
❗️ *पोस्ट- 20* ❗️
⚔️ *उमर बिन सा‘द___ और बाईस हज़ार का लश्कर !!*
⚔️ जब इब्ने जियाद को पता चला की हज़रत इमाम हुसैन रदीअल्लाहु तआला अन्हु ने यजीद की बैत करने से इन्कार कर दिया तो उसका गुस्सा और तैश और बढ़ गया। उसने और लश्कर बढ़ा दिये, और उसका सिपेह सालार *उमर बिन सा‘द* को बनाया, जो उस जमाने में मुल्के रै का गवर्नर था। रै खुरासान का एक शहर है जो ईरान में है, आजकल इसे तेहरान के नाम से जाना जाता है।
⚔️ *इमाम हुसैन की अजमत और फजीलत से हर कोई वाकिफ था।* इसलिए पहले तो उमर बिन सा‘द ने सिपेह सालार बनने से गुरैज करना चाहा, लेकिन इब्ने जियाद ने कहा कि या तो हुकूमत छोड़ दो या फिर इमाम हुसैन से मुकाबला करो। *दुनियावी हुकूमत की लालच ने इब्ने सा‘द को जंग पर आमदा कर दिया।*
🤺 इब्ने सा‘द तमाम लश्कर ले कर इमाम हुसैन के मुकाबले के लिये रवाना हुआ। इब्ने जियाद बद निहाद थोड़ा- थोड़ा लश्कर उसके पास भेजता रहा, *यहां तक कि इब्ने सा‘द के पास *बाईस हज़ार का लश्कर जमा हो गया।* इब्ने सा‘द ने अपने *२२०००* के लश्कर के साथ करबला पहुंच कर फुरात के किनारे पड़ाव किया और वहां अपना मर्कज काईम किया।
👉🏼 हैरतनाक बात है और दुनिया की किसी जंग में इस की मिशाल नहीं मिलती कि, *कुल बयासीं (82) तो लोग थे, जिनमें बीबियां भी, बच्चे भी, बीमार भी और वोह भी बे इरादा ए जंग आए है।*
*वोह इन बयासीं को क्या समजते थे ?* और उनकी शुजाअत व बसालत के कैसे मंज़र देखे होंगे कि इस छोटी सी जमात के लीये दो गुनी, चौ गुनी, दस गुनी तो क्या सौ गुनी तादाद को भी काफी ना समझा और फौजों के पहाड़ लगा दिये।
🌊 इब्ने सा‘द की और से लगातार इमाम हुसैन को यजीद की बैत करने पर इसरार किया जा रहा था, *जब आप पर लश्करी ताकत का कोई असर ना हूवा, तो जालिमों ने आपके काफिले पर फूरात का पानी बन्द कर दिया,* ताकि भूख और प्यास की शिद्दत से आप मजबूर हो जाए, और बैत को कुबूल करने पर मजबूर हो जाए।
(📚 *सवानाहे करबला सफा 134)*
*⌛ ( बाकी अगली पोस्ट में इंशा अल्लाह )*
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