और आले रसूल के गुस्ताखों का अंज़ाम 23
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*🥀 दास्तानें करबला 🥀*
❗️ *पोस्ट- 23* ❗️
*!!____इमाम हुसैन की करामात____!!*
*और आले रसूल के गुस्ताखों का अंज़ाम* ⚔️
1️⃣
🤺 जब इमाम हुसैन जंग के मैदान में तशरीफ लाए और यजीदी लश्कर को मुखातिब होकर खुतबा बयान फ़रमाया, तब एक शख्स घोडा दौड़ा कर सामने आया (जिसका नाम मालिक बिन उर्वा था) जब उस ने देखा की इमाम हुसैन खैमे के इर्द-गिर्द खन्दक में आग जल रही है और शोले बुलंद हो रहे है..... और इस तदबीर से अहले खैमा की हिफाज़त की जाती है तो उस गुस्ताख ने हज़रते इमाम हुसैन से कहा कि:
*"ऐ हुसैन ! तुम ने वहां (यानी जहन्नम) की आग से पहले यहीं आग लगा ली ?*
▪️ हज़रते इमाम हुसैन ने फ़रमाया: "ऐ दुश्मने खुदा ! तू काजीब है। *तुझे गुमान है की में दोज़ख में जाऊँगा ?"*
▪️ मुस्लिम बिन औसजा को मालिक बिन उर्वा का ये कलिमा बहुत न गवार हुवा और उन्हों ने हज़रते इमाम हुसैन से *उस गुस्ताख के मुंह पर तीर मारने की इजाज़त चाही।*
▪️ *आप ने फ़रमाया : खबरदार ❗️ मेरी तरफ से कोई जंग की इब्तिदा (शुरुआत) न करे* ताकि, इस खून रेजी का बवाल दुश्मन ही की गर्दन पर रहे और हमारा दामन इक़दाम से आलूदा न हो।
🤲🏼 हाथ उठा कर इमामे हुसैन ने बारगाहे इलाही में अर्ज़ किया: *"या रब ❗️ अज़ाबे नार से पहले, इस गुस्ताख को दुन्या ही में आग के अज़ाब में मुब्तला कर।*
⚡️ इमाम हुसैन का हाथ उठना ही था की, उस के घोड़े का पाउं एक सुराख में गया और वोह घोड़े से गिरा और उसका पाउं रिकाब में उलझा और *घोडा उसे ले कर भागा और आग की खन्दक में ला कर डाल दिया।*
▪️ इमाम हुसैन ने सजदऐ शुक्र अदा किया और अपने रब की हम्दो षना की और फ़रमाया : "ऐ परवरदिगार तेरा शुक्र है कि, तूने अहले बैते रिसालत के बदबख्त को सज़ा दी।
2️⃣
🤺 हज़रते इमाम हुसैन की ज़बान से ये कलिमा सुन कर दुश्मन में से एक और गुस्ताख ने कहा की : *“आप को पैगम्बरे खुदा से क्या निस्बत ?* ये कलिमा तो इमाम के लिये बहुत तकलीफ देह था।
🤲🏼 आप ने उस के लिये भी बद दुआ फ़रमाई और अर्ज़ किया: *या रब ❗️ इस बदज़बान को फौरी अज़ाब में गिरफ्तार कर।*
⚡️ इमाम हुसैन ने ये दुआ फ़रमाई और उस गुस्ताख को क़ज़ाए हाजत की ज़रूरत पेश आई, घोड़े से उतर कर एक तरफ भागा और किसी जगह क़ज़ाए हाजत के लिये बरहना हो कर बेठा। *एक काले बिच्छु ने डंख मारा तो नजासत आलूदा तड़पता फिरता था। इस रुस्वाई के साथ तमाम लश्कर के सामने उस नापाक की जान निकली।*
⚔️ आपने लश्कर से कहा: "देखलो, मेरा मरतबा बारगाहे इलाही में किस कदर बुलंद है कि, मेरे हाथ उठाते ही दोनों गुस्ताखों का क्या अंज़ाम हुवा है।"
लेकिन सख्त दिल लश्कर ने कहा ये तो महज एक इत्तेफाक है।
3️⃣
🤺 एक और शख्स मुज़नी ने इमाम हुसैन के सामने आ कर कहा कि :
"ऐ इमाम ❗️ देखो तो दरयाए फुरात केसा मौज़े मार रहा है। *खुदा की क़सम खा कर कहता हूं तुम्हे इस का एक क़तरा न मिलेगा और तुम प्यासे हलाक हो जाओगे।*
🤲🏼 हज़रते इमाम हुसैन ने उस के हक़ में फ़रमाया : *या रब इसको प्यासा मार....*
⚡️ आप का ये फरमाना था की मुज़नी का घोडा चमका, मुज़नी गिरा, घोडा भागा और मुज़नी उस को पकड़ने के लिये उस के पीछे दौड़ा और प्यास उस पर ग़ालिब हुई, इस शिद्दत की ग़ालिब हुई की اَلْعَطَشُ اَلْعَطَشُ पुकारता था *और जब पानी उस के मुह से लगाते थे, तो एक क़तरा न पी सकता था यहाँ तक की इसी शिद्दते प्यास में मर गया।*
*(📚 सवनाहे करबला सफा 139)*
*⌛ ( बाकी अगली पोस्ट में इंशा अल्लाह )*
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