शहादत__के__वाक़िआत 24
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*🥀 दास्तानें करबला 🥀*
❗️ *पोस्ट- 24* ❗️
⚔️ *___शहादत__के__वाक़िआत___*
🤺 इमाम हुसैन रदीअल्लाहु तआला अन्हु की *करामात* देखने के बावजूद सख्त दिल लश्कर ने इसे महज इत्तेफाक कहे कर टाल दिया और *इस से सबक हासिल ना कर सके....* और अपनी तलवार और नेजे लेकर आप से जंग करने कूद पड़े।
🤺 इमामे आली मकाम और इमाम के खानदान के नौनिहाल शैके जाबाज़ी में सरशार थे। *उन्हों ने मैदान में जाना चाहा। लेकिन, क़रीब के गांव वाले जहा इस हंगामे की खबर पहुची थी.... वहां के मुसलमान बेताब हो कर, आपकी खिदमत में हाजिर हुवे और उन्होंने इसरार किया, जब तक हम में से एक भी जिन्दा है, ख़ानदाने अहले बैत का कोई बच्चा भी मैदाने जंग में ना जाए।* आपको इन इख्लास केशो की सरफरोशाना इलतीजाए मंजूर फ़रमानी पड़ी।
🤺 ......और उन्हों ने मैदान में पहुच कर दुश्मनों से मुक़ाबले किये और अपनी बहादुरी के सिक्के जमा दिए और *एक-एक ने दुश्मनों की कशीर तादाद को हल्का कर के राहे जन्नत इख़्तियार करना शुरू की ।* इस तरह बहुत से जांबाज़ फरज़न्दे रसूल पर अपनी जाने निषार कर गए।
🤺 इस क़बीले में *वहब इब्ने अब्दुल्लाह कल्बि जिनकी शादी को सिर्फ 17 दिन हुए थे,* इमाम हुसैन की बारगाह में हाजिर हुवे और अहले बैत की मुहब्बत में जांनिशार करने का इजहार किया। *आप की इजाजत ले कर जब जंग के मैदान में उतरे तो, सैकड़ों की तादाद में दुश्मनों के सर काट के रख दिये।*
.......आखिरकार अम्र बिन साद ने परेशान हो कर हुक्म दिया कि, *लोग इस के गिर्द हुजूम कर के हमला करदे और हर तरफ से एक साथ हमला करें,* ऐसा ही किया और जब वो नौजवान ज़ख्मो से चूर हो कर ज़मीन पर आया.... तो सियाह दिलोंने बद बातिन ने उसका सर काट कर लश्करे इमाम हुसैन में डाल दिया।
🤺 वहब के बाद सआदत मन्द अपनी जाने फ़िदा करते रहे। *इस ज़िमरे में हूर बिन रुबाही का ज़िक्र काबिले तवज्जोह है। ये वही है, जिन्होंने सब से पहले इब्ने जियाद के हुक्म पर आपको कूफा में जाने से रोका था।*
..........जंग के वक़्त हूर बिन रूबाही का दिल बहुत मुज़तरिब था और उन की बेक़रारी उन को एक जगह न ठहरने देती थी, कभी वो अम्र बिन साद से जा कर कहते थे की, *तुम इमाम हुसैन के साथ जंग करोगे तो रसूलल्लाहﷺ को क्या जवाब दोगे ?* अम्र बिन साद को इस का जवाब न बन आता था। वहां से हट कर फिर मैदान में आते है, बदन कांप रहा है, चेहरा ज़र्द है।
..........उन का ये हाल देख कर उनके भाई मुसअब ने पूछा की, आप मशहूर जंग आज़मा और दिलावर है, आप के लिये ये पहली जंग नहीं, बारहा जंग के खुनी मनाज़िर आप ने देखे है। *आप इस कदर खौफ में क्यों हो ?*
*हूर ने कहा की ये मुस्तफा के फ़रज़न्द से जंग है, अपनी आकिबत से लड़ाई है, में जन्नत और दोज़ख के बीच में खड़ा हुं।* दुन्या पूरी ताकत के साथ मुझ को जहन्नम की तरफ खीच रही है और मेरा दिल उसकी हैबत से कांप रहा है।
*इसी आशना में हज़रते इमाम हुसैन की आवाज़ आई.....*
*"कोई है ? जो आज आले रसूल पर अपनी जान निषार करे ?? और हुज़ूर की हुज़ूरी में सुर्ख रुई पाए....* ❓
*(📚 सवनाहे करबला सफा 152)*
*⌛ ( बाकी अगली पोस्ट में इंशा अल्लाह )*
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