हूर बिन रुबाही की शहादत 25

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     *🥀 दास्तानें करबला 🥀* 



           ❗️ *पोस्ट- 25* ❗️

💔 *___शहादत__के__वाक़िआत___*  💔


*!!_____हूर बिन रुबाही की शहादत_____!!*

⚔️      जब *इमाम हुसैन* रदीअल्लाहु तआला अन्हु ने आवाज लगाई : *"कोई है जो आज आले रसूल पर जान निषार करे और हुज़ूर की हुज़ूरी में सुर्ख रुई पाए।"*

⚔️      *हज़रते इमाम की इस सदा ने हूर बिन रबाही की पाउं की बेड़िया काट दी,* दिले बेताब को क़रार बख्शा और जान फ़िदा करने के इरादे से चल पड़े।

            *हूर ने घोडा दौड़ाया और इमाम हुसैन की खिदमत में हाज़िर हो कर* घोड़े से उतर कर अर्ज़ की: 
           " ऐ इब्ने रसूल ❗️  मैं वही हूर हुं जो पहले आप के मुक़ाबिल आया और जिस ने आप को इस मैदाने बयाबान में रोका। *अपनी इस हरकत पर नादिम हुं, शर्मिंदगी नज़र नही उठाने देती,* आप की करिमाना सदा सुन कर उम्मीदों ने हिम्मत बंधाई तो हाज़िरे खिदमत हुवा हुं, आप के करम से इस जुर्म की मुआफ़ी फरमाए और गुलामो में शामिल करे और *अपने अहले बैत पर जान कुर्बान करने की इजाज़त दे।*

       ..........हज़रते इमाम हुसैन ने हूर के सर पर दस्ते मुबारक रखा और फ़रमाया : ऐ हूर ❗️ बारगाहे इलाही में इख्लास मंदो के इस्तिग़फ़ार मक़बूल है और तौबा मुस्तजाब, उज़्र ख्वाह महरूम नही जाते, *और वही है जो अपने बन्दों की तौबा क़बूल फ़रमाता है* (पारह25), मैं ने तेरी तकसीर मुआफ़ की और इस सआदत के हुसूल की इजाज़त दी।

⚔️     हज़रते इमाम हुसैन की इजाज़त पा कर हुर मैदान की तरफ रवाना हुवे, घोडा चमका कर सफे दुश्मन पर पंहुचा, *हूर के भाई मुसअब् ने देखा की हूर ने दौलते सआदत पाई और नेमते आख़िरत से और हीर्से दुन्या से उसका दामन पाक हुवा, उसके दिल में भी वलवला उठा और बाग़ उठा कर घोडा दौड़ाता हुवा चला।*

🤺     अम्र बिन साद के लश्कर को गुमान हुवा की भाई के मुक़ाबले के लिये जाता है। जब मैदान में पंहुचा, भाई से कहने लगा : *भाई तू मेरे लिये खिज़्रे राह हो गया और मुझे तूने सख्त अज़ाब से नजात दिलाई, मैं भी तेरे साथ हुं। "*

🤺      लश्करे यज़ीद को इस वाक़या से निहायत हैरानी हुई। *अब हूर ने लश्करे इब्ने साद के मैमना पर हमला किया और खूब ज़ोर की जंग हुई, लश्कर इब्ने साद को हूर के जंगी हुन्नर का ऐतिराफ करना पड़ा और वो जाँबाज़ सादीके दादे शुजाअत दे कर फरज़न्दे रसूल पर जान फ़िदा कर गया।*

⚔️     हज़रते इमाम हुसैन हूर को उठा कर लाए और उसके सर को जानुए मुबारक पर रख कर अपने पाक दामन से उस के चेहरे का गुबार दूर फरमाने लगे, *अभी रमके जान बाक़ी थी, आँखे खोली, देखा की इब्ने रसूल की गोद में है।* अपने बख्त व मुक़द्दर पर नाज़ करता हुवा जन्नतुल फ़िरदौस को रवाना हुवे।

🤺     *हूर के साथ उसके भाई और गुलाम ने भी दादे शुजाअत दे कर अपनी जाने अहले बैत पर क़ुरबान कर दी ।*

*(📚 सवनाहे करबला सफा 150)*

*⌛ ( बाकी अगली पोस्ट में इंशा अल्लाह )*



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