इमामे हुसैन__की__ शहादत * 29
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*🥀 दास्तानें करबला 🥀*
❗️ *पोस्ट- 29* ❗️
⚔️ *___शहादत__के__वाक़िआत___* ⚔️
💔 * इमामे हुसैन__की__ शहादत * 💔
🤺 अब तक जां निषार एक-एक करके रुख्सत हो चुके और हज़रते इमाम हुसैन पर जाने क़ुरबान कर गए, *अब तन्हा हज़रते इमाम हुसैन है और एक फ़रज़न्द हज़रते ज़ैनुल आबेदीन वो भी बीमार....।*
.........फिर भी हज़रते ज़ैनुल आबेदीन ख़ैमे से बाहर तशरीफ लाए और हज़रते इमाम हुसैन को तन्हा देख कर अपनी जान कुर्बान करने के लिये नेज़ा हाथ में लिया.....लेकिन, बिमारी, सफर की थकावट, भूक - प्यास, फाक़ो और पानी की तकलीफो से ज़ोफ़् इस दर्जे बढ़ गया था की खड़े होने से बदन मुबारक लरजता था। *बा वुजूद इसके हिम्मते मर्दाना का ये हाल था की मैदाने जंग में जाने का इरादा कर लिया ।*
⚔️ *हज़रते इमाम हुसैन ने फ़रमाया :*
"*लौट आओ, मैदान जाने का क़स्द न करो,* मैं कुम्बा क़बीला, अज़ीज़ों अक़ारिब, खुद्दाम जो हमराह थे राहे हक़ में निषार कर चूका। तुम्हारी ज़ात के साथ बहुत उम्मीदे वाबस्ता है......."
*"........बे कसाने अहले बैत को वतन तक कौन पहुचाएगा ? बीवियों की निगाहदस्त कौन करेगा ? क़ुरआन की मुहाफ़ज़त और हक़ की तबलीग का फ़र्ज़ किस के सर पर रखा जाएगा ? मेरी नस्ल किस्से चलेगी.....?"*
"ये सब तुम्हारी ज़ात से वाबस्ता है। दुदमाने रिसालत व नबुव्वत के आखरी चराग तुम ही हो। ऐ नुरे नज़र ! लख्तें जिगर ! *ये तमाम काम तुम्हारे ज़िम्मे किये जाते है, मेरे बाद तुम ही मेरे जानशीन होंगे, तुम्हे मैदान जाने की ज़रूरत नही है।*
🤺 इमामे आली मकाम ने इमाम ज़ैनुल आबेदीन को इन तमाम ज़िम्मेदारियों का हामिल किया और खुद जंग के लिये तैयार हुए, *इमाम हुसैन मैदान जाने के लिये घोड़े पर सुवार हुए।*
🤺 हज़रते इमाम हुसैन ने अपने अहले बैत को तल्किने सब्र फ़रमाई। रिज़ाए इलाही पर साबिरो शाकिर रहने की हिदायत की और सब को सुपुर्दे खुदा करके मैदान की तरफ रुख किया....
⚔️ *खुतबा___ए___इमाम हुसैन* ⚔️
🌹 *आप ने एक ख़ुत्बा फ़रमाया और इसमें हम्दो सलात के बाद फ़रमाया :*
"ऐ क़ौम ❗️ खुदा से डरो, जो सबका मालिक है, जान देना, जान लेना सब उसके कुदरत व इख़्तियार में है। अगर तुम ख़ुदावन्दे आलम पर यक़ीन रखते और मेरे हज़रते अम्बिया मुहम्मद मुस्तफाﷺ पर ईमान लाए हो, *तो डरो की क़यामत के दिन मीज़ाने अदल क़ाइम होगी, आमाल का हिसाब किया जाएगा, मेरे वालीदेन मेहशर में अपनी आल के बे गुनाह खुनो का मुतालबा करेगे।"*
"हुज़ूरﷺ जिन की शफ़ाअत गुनाहगारो की मग्फिरत का ज़रिया है और तमाम मुसलमान जिनकी शफ़ाअत के उम्मीद वार है, *वो तुम से मेरे और मेरे जानिषारो के खूने नाहक़ का बदला चाहेंगे,* खबरदार हो जाओ की ऐशे दुन्या में पाएदारी व क़याम नही.....
"..........अगर सल्तनत की तमअ में मेरे दरपै आज़ार हो, *तो मुझे मौक़ा दो की में अरब छोड़ कर दुन्या के किसी और हिस्से में चला जाऊ।* अगर ये कुछ मंज़ूर न हो और अपनी हरकात से बाज़ न आओ तो हम अल्लाह के हुक्म और उसकी मर्ज़ी पर साबिर व शाकिर है।"
🤺 हज़रते इमाम हुसैन की ज़बान से ये कलिमात सुन कर कुफियो में से बहुत लोग रो पड़े, *दिल सब के जानते थे की इमामे हुसैन हक़ पर है।* आप की बात से बहुत से लोगो पर असर हुवा और ज़ालिमाने बद बातिन ने भी एक लम्हे के लिये जससे अशर लिया।
*(📚 सवनाहे करबला सफा 165)*
*⌛ ( बाकी अगली पोस्ट में इंशा अल्लाह )*
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