इमामे हुसैन__की__ शहादत 30
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*🥀 दास्तानें करबला 🥀*
❗️ *पोस्ट- 30* ❗️
⚔️ *___शहादत__के__वाक़िआत___* ⚔️
💔 *इमामे हुसैन__की__ शहादत / 2* 💔
🤺 जब इब्ने साद और शिमर ने देखा कि, हज़रत इमाम हुसैन के ख़ुतबे का असर कुछ लश्करियों पर पड़ रहा है, तो बद-बख्त कहने लगे: "आप अपने किस्से बन्द कीजिए, और इब्ने जियाद के पास चल कर..... *यजीद की बैअत को कुबूल कर लीजिए, तो कोई आप से जंग ना करेगा.... वरना जंग के अलावा कोई चारा नहीं।*
⚔️ हज़रते इमाम हुसैन को अंजाम मालुम था, लेकिन आप ने ये तक़रीर इक़ामते हुज्जत के लिये फ़रमाई थी, ताकि, उन्हें कोई उज़्र बाक़ी न रहे।
🤺 जब इमाम हुसैन ने इत्मीनान फ़रमाया कि, अब इनके लिये कोई उज़्र बाक़ी न रहा और ये किसी तरह खूने नाहक व ज़ुल्म से बाज़ आने वाले नही..... *तो, इमाम हुसैन ने फ़रमाया की, तुम जो इरादा रखते हो पूरा करो और जिस को मेरे मुक़ाबले के लिये भेजना चाहते हो भेजो।"*
🤺 *मशहूर बहादुर जिन को आप से मुक़ाबले के लिये महफूज़ रखा गया था मैदाने जंग में भेजे गए।*
.....*एक बे-हया तलवार चमकाता आता है,* आते ही हज़रते इमाम हुसैन की तरफ तलवार खिचता है, अभी हाथ उठा ही था की, *इमाम हुसैन ने ज़र्ब फ़रमाई, सर कट कर दूर जा पड़ा और उसका गुरूरे बहादुरी ख़ाक में मिल गया।*
🤺 दूसरा बढ़ा और, लशकरियों को यक़ीन था की हज़रते इमाम पर भूक प्यास की तकलीफ हद से गुज़र चुकी है, सदमो ने ज़ईफ़ कर दिया है, ऐसे वक़्त इमाम पर ग़ालिब आ जाना कुछ मुश्किल बात नही है।
......जब वो गुस्ताख सामने आया तो इमाम हुसैन ने फ़रमाया :
*"क्या तु मुझे नही जानता जो मेरे मुक़ाबिल इस दिलेरी से आता है.... हुसैन को बे-कस व कमज़ोर देख कर होसला मन्दियो का इज़हार कर रहे हो ??? नामर्दो ❗️ मेरी नज़र में तुम्हारी कोई हक़ीक़त नही।"*
वो गुस्ताख ये सुन कर और तेश में आया और बजाए जवाब के हज़रते इमाम हुसैन पर तलवार का वार किया, आप ने उस का वार बचा कर कमर पर तलवार मारी, और उस बदबख्त के दो टुकड़े कर दिए ।
🤺 अब इमाम हुसैन ने यजीदी लश्कर पर हमला कर दिया और जिस तरफ रुख किया दुश्मनों की सफे की सफे काट डाली.... ज़मीने कर्बला में यजीद के सिपाहियों की लाशों का खेत बो दिया।
दुश्मन के लश्कर में शोर बरपा हो गया की... जंग का ये अंदाज़ रहा.... तो हैदर का एक अकेला शेर कूफा के ज़न व इतफाल को बेवा व यतीम बना कर छोड़ेगा।
.......मौक़ा मत दो और चारो तरफ से घेर कर एकसाथ हमला करो। *हज़ारो जवान दौड़ पड़े और हज़रते इमाम हुसैन को घेर लिया और तलवार बरसानी शुरू की ।*
🤺 इमाम हुसैन ने जिस तरफ अपना घोडा बढ़ा दिया पर्रे के पर्रे काट डाले। *इमामे हुसैन की तलवार इस तरह चल रही थी, मानो आसमान से बिजली बरस रही हो ।* दुश्मन हैबत ज़दा हो गए और हैरत में आ गए की इमाम के हमले से रिहाई की कोई सूरत नही। हज़ारो आदमियों में घिरे हुए है और *दुश्मनो का सर इस तरह उड़ा रहे है, जिस तरह आंधियां चलने से दरख्तो के पत्ते गिरते है।*
🤺 *इब्ने साद व शिमर और उस के साथीयों को बहुत हैरत हुई कि..... अकेले इमाम हुसैन के मुक़ाबिले में हज़ारो का लश्कर कम पड़ रहा है। यजीदी सोच में पड़े है कि, कहीं ये अकेले सारे लश्कर को हलाक ना कर दे....*
🤺 *कुफियो की इज़्ज़त ख़ाक में मिल गई,* तमाम नामवरो की कुफि जमाअत एक हिजाज़ी जवान के हाथ से जान न बचा सकी। यजीदी परेशान है कि, तारीख में हमारी नामर्दी का ये वाकिया लिखा जाएगा और अहले कूफा को हमेशा रूस्वा करता रहेगा,
..........यजीदीयों ने सोचा अगर इमामे हुसैन को रोकने की कोई तदबीर ना सोची गई.... *तो सारे के सारे इमाम हुसैन की तलवार से हलाक हो जाएंगे... ।*
*(📚 सवनाहे करबला सफा 170)*
*⌛ ( बाकी अगली पोस्ट में इंशा अल्लाह )*
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