ताज़िया बनाना, उसे देखना, उसकी अज़मत (इज़्ज़त) करना मन्नत मांगना कैसा है* 07

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*🌹ﺃﻋﻮﺫ ﺑﺎﻟﻠﻪ ﻣﻦ ﺍﻟﺸﻴﻄﺎﻥ ﺍﻟﺮﺟﻴﻢ 🌹ﺑِﺴْــــــــــــــــﻢِﷲِﺍﻟﺮَّﺣْﻤَﻦِﺍلرَّﺣِﻴﻢ*
*🌹السلام علیکم ورحمۃ اللہ وبر ر کا تہ*
*🌹الصــلوة والسلام عليك يارسول الله ﷺ*

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*_🌙 इस्लामी तारीख_*
*_07/01/1445_* 
*_मोहर्रमुल हराम_* 
*_⛅ दिन; बुध_*                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                             
*_🗓️ अंग्रेजी तारीख_*
*_26/07/2023_*     
*_जुलाई_*
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*🧮 पोस्ट 156▪️*


*📝 सवाल :-*
*📇 ताज़िया बनाना, उसे देखना, उसकी अज़मत (इज़्ज़त) करना मन्नत मांगना कैसा है*

 
*✍️ जवाब :-* 
*📇 मुरव्वजा ताज़िया बनाना देखना बिदअ़त -ए- सइया (बुरी बिदअ़त) है और उसकी ताज़ीम -व- अज़मत करना सख़्त हराम और सख़्त बिदअ़त है।*
*मन्नत का मतलब होता है नज़्र मानना और इससे किसी चीज़ को ख़ुद पर वाजिब कर लेना और सबसे पहले ये बात याद रखें कि मन्नत दो तरह के होते हैं*
*मन्नते शरई: यानी वो मन्नतें जो शरई हैं और इनको मानने से वो अमल खुद पर करना वाजिब हो जाता है, जैसे मन्नत में रोज़ा, नमाज़, नफ़्ली हज, नफ़्ली उमरह वगैरह का मानना,* 
*मन्नते उर्फ़ी: यानी वो मन्नतें जो शरई तो नही हैं लेकिन जाएज़ हैं जैसे मज़ार की हाज़िरी और नज़र व नियाज़, लंगर करना, और कुछ लोग चादर चढ़ाने की मन्नत मानते हैं तो याद रहे किसी मज़ार पर जब तक एक चादर सही है तो दूसरी चादर चढ़ाना फ़ुज़ूल है इस लिए बेहतर है कि वो रक़म किसी ग़रीब या ज़रूरतमंद को दे दें,*

 *📚 फ़तावा रज़विया, जिल्द 24, पेज न० 490,507*
*📚 फतावा रज़विया जिल्द 09*
*📚 फैज़ाने आला हज़रत 26/258*

*👉 नोट: हमें हमेशा मन्नते शरई का एहतिमाम करना चाहिए कियूंकि इसमे आसानी है, और जाएज़ काम मे ही मन्नत मनना चाहिये, बाक़ी रब की रिज़ा और हिकमत पर राज़ी रहें कि वो बेहतर जानने वाला बड़ा हिकमत वाला है*
          
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*💉 अपनी औलादो में आला हज़रत की मोहब्बत डाल दो वरना बड़े होकर अपने मां बाप की कब्र पर जाना भी 😝शिर्क समझेंगे।*

*💓 हैं पुश्त-पनाह ग़ौषे आज़म​* 
*क्युं डरते हो तुम रज़ा किसी से*

*👏 अल्लाह हमे अपने महबूब हुज़ूर सल्लल्लाहों अलैहि वसल्लम के सदके तुफैल इल्मे दीन सीखने समझने और अमल करने की तौफ़िक अता करे।*
*▪ امیــــــن ▪*

*🔛((((( अगली पोस्ट जल्द )))))*



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*👏🏁 गदा ए फकीर रज़वी कादरी हनफी बरेलवी 🔴* *جزاک اللہ خیر*
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